Sunday, 31 May 2015

Doga Poetry

डोगा की काव्यगाथा।
लेखन- Vishal Pandey [  https://www.facebook.com/pandey.vibhav07 ]

है वीर,प्रचंड,तीव्र तथा है बाहुबली यह कौशल से।
है अटल,अड़िग,सर्वोच्च तथा है अरोधनीय मंतव्यों से।

है भीमकाय काया जिसकी,सीने पर कवच कर्ण जैसा।
चूके ना कभी भी लक्ष्य से यह,है लक्ष्यभेदन अर्जुन जैसा।

बाल्यावस्था में इसको पीड़ाओं का भंडार मिला।
भूल चुका अब दर्द है क्या,इतना इसको अपमान मिला।

अश्रु की नदी वाष्पित हुई,अब शेष नहीं जल नेत्रों में।
दुनिया से ठोकर खाते हैं जो,वो शामिल इसके मित्रों में [कुत्ते]।

कोमल शरीर अब इसका यह,गढ़कर-तपकर फौलाद हुआ।
है देवतुल्य अच्छों के लिए,दुष्टों के लिए जल्लाद हुआ।

खुद पर आँच जो भी आये,सह सकता नहीं दुसरों पर।
प्रण लिया जुर्मखात्मे का,चल पड़ा अपने ही सूत्रों पर।

थे असहाय,बेबस,विवश,,जब ये कानूनी रखवाले।
तब किसी अँधेरे कोने से,टूटे अपराध के हर ताले।

पापजगत के अंधियारे में,अनिवार्य था सूरज का छिप जाना।
आवश्यकता थी रात के रक्षक की,डोगा को तो था ही आना।

मुख पर नकाब था कुत्ते का,वफादारी का जो प्रतीक बना।
था सुसस्जित कवच और शस्त्रों से,अपराध विरुद्ध जो जीत बना।

बस एक इशारे से इसके,हर कुत्ता मदद को हाज़िर था।
सब अस्त्र विफल थे शत्रु के,यह डोगा इतना माहिर था।

अँधियारे के अंत हेतु,अँधियारे में तब्दील हुआ।
थी पापनाश पूजा जिसकी,अब यही इसकी तकदीर हुआ।

इसके क़दमों की आहट से,अपराधी अब थर्राते हैं।
हों पापी सतेज कितने भी,नतमस्तक शीर्ष झुकाते हैं।

था अनाथ भले ही बचपन से,इसको न किसी का प्यार मिला।
अब आशीर्वाद है इसे हर एक माँ का,हर पिता से इसे वरदान मिला।

चट्टानों को चीर दे जो,उस मनोबल का यह स्वामी है।
जो प्राण त्याग दे जनहित में,उस भव्य वर्ग का दानी है।

इसके जूनून के लावे से,हर पापभवन ढह जाता है।
एक ज्वालामुखी सा फटता है,डोगा को क्रोध जब आता है।

हो रात अँधेरी या दिन हो,अपराध नाश को तत्पर है।
हर एक दुष्ट अपराधी पर,डोगा की एक पैनी नजर है।

अत्याचार पापियों का,,विध्वंश इनका अब सीमित है।
नगर में शांति का मंजर है,यह डोगा जबतक जीवित है।

अपराध खात्मे के पश्चात,अँधेरे में खो जाता है।
जब भी बू आती है पाप की,तब डोगा सूँघकर आता है।

आपको यह छोटा सा प्रयत्न कैसा लगा? :)

Friday, 8 May 2015

Mai Hun Doga Vyaktam Video Song Lyrics

Composition - Vyaktam [A Delhi Based Rock Band]

Place & Time - LIVE At Comics Fest India, Delhi Haat, Pitampura on 29th November, 2013.

YouTube Link

Lyrics~~

Mai Hun Doga,,Mai Hun Doga
Jo Kahunga Sunana Hoga [x4]

Har Taraf Tharthari Thi,,Iss Sheher Me Koi Nahi Sunta....
Pagal Khudi Mai,,Hun Bala Mai,,Gandagi Se Mai Nahi Darta.....

Mai Hun Doga,,Mai Hun Doga
Jo Kahunga Sunana Hoga [x2]

Chaal Chalte Kaal Saare,,Waqt Ki Paheliyan....
Rakt Behta Naaliyon Me,,Laal Hai Ye Aasman....  [x2]

Mai Hun Doga,,Mai Hun Doga
Jo Kahunga Sunana Hoga [x2]

Doga Ki Dhamki Ko Mat Kar Ansuna.....
Paap Ka Packet Hoga To Tax Lunga Dugna..... [x2]

Aa Raha Hai,,Dekh Doga....
Paapiyon Ka Ant Hoga [x2]

Sher Ki Si Kad Hai Meri,,Kutte Ki Hai Meri Surat.....

Mai Hun Doga,,Mai Hun Doga
Jo Kahunga Sunana Hoga [x6]

Mai Hun Dogaaa.......

Sunday, 3 May 2015

Nagfani Sarp & Dhwansak Sarp

Nagfani Sarp Lives Inside The Body Of Nagraj.... Nagfani Sarp [Sarp=Snake] Releases Dhwansak Sarp [Visfo Sarp] From His Mouth.....
Dhwansak Sarp [Dhwansak Snakes] Explode When Collide With Something....
The Attack & Explosion Of Dhwansak Sarp Are More Lethal Than Army Tanks.....
Origin Of Nagfani Sarp & Dhwansak Sarp Can Be Seen In Narak Ahuti of Narak Nashak Nagraj's Origin Series.

नागफनी सर्प नागराज के शरीर में निवास करने वाला एक इच्छाधारी सर्प है जिसके मुँह से ध्वंसक सर्प बाहर निकलते हैं.....ये ध्वंसक सर्प किसी चीज़ से टकराने के पश्चात् तगड़ा विस्फोट करते हैं।
ध्वंसक सर्पों की मारक क्षमता आर्मी टैंक्स से भी घातक है।
नागफनी और ध्वंसक सर्पों की उत्पत्ति नरक आहुति कॉमिक्स में देखी जा सकती है।