Monday, 1 December 2014

Nagraj Biography

~~Nagraj~~

Wikipedia-Nagraj

सिंहावलोकन

नागराज का सर्वप्रथम अंक सुप्रसिद्ध लेखक परशुराम शर्मा द्वारा लिखा गया था और इसे प्रताप मलिक ने चित्रित
किया था. मलिक ने 1995 तक लगभग 50 अंकों के लिए इस चरित्र का सफलतापूर्वक चित्रण किया था. 1995 के बाद से, चित्रण का काम चित्रकार और लेखक अनुपम सिन्हा ने संभाल लिया. आज नागराज जो कुछ भी है, वह भारतीय कॉमिक उद्योग के इन दिग्गज प्रताप मलिक और अनुपम सिन्हा की वजह से है।

नागराज का चरित्र पौराणिक इच्छाधारी नाग (आकार बदलने वाले सांप), ऐतिहासिक विषैला मानव से प्रेरित माना जाता है. उसकी कहानियों में पुराण, कल्पना,
जादू और विज्ञान गल्प का समृद्ध मिश्रण है. नागराज के कई
प्रशंसकों का यह मानना है कि समय के साथ नागराज कॉमिक्स ने
अपना ही एक सर्प पुराण विकसित किया है जो जनता के बीच सांपों के बारे में प्रचलित लोकप्रिय भारतीय मान्यताओं के लिए अद्वितीय है।

नागराज की मूलतः कल्पना अंतर्राष्ट्रीय
आतंकवाद के एक दुश्मन के रूप में की गई थी. दिलचस्प बात यह है कि अपने पहले अंक में नागराज को दुष्ट वैज्ञानिक प्रोफ़ेसर नागमणि द्वारा एक
अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी हथियार के
रूप में प्रवर्तित किया गया था. नागराज को इस पहले मिशन में आदिवासी भक्तों, सांपों और रहस्यमय 300 से
भी ज़्यादा उम्र के गोरखनाथ बाबा नामक बूढ़े साधु से संरक्षित एक मंदिर से देवी की मूर्ति चुराने का जिम्मा सौंपा गया था. नागराज अपने कार्य में सफल रहा, लेकिन गोरखनाथ और उनके रहस्यमय काले नेवले शिकांगी से मुक़ाबले में परास्त हो गया. गोरखनाथ ने उसका मन पढ़ लिया और पता लगाया कि प्रोफ़ोसर नागमणि ने नागराज को अपने नियंत्रण में रखने के लिए उसके सिर में एक कैप्सूल के रूप में मन को नियंत्रित करने वाले यंत्र का प्रत्यारोपण किया है। गोरखनाथ ने शल्य-चिकित्सा की और नागराज के सिर से कैप्सूल को हटा दिया, जिससे नागराज प्रोफ़ेसर नागमणि के
नियंत्रण से मुक्त हो गया. इसके बाद नागराज बाबा गोरखनाथ का शिष्य बन गया और उसने पृथ्वी से अपराध और
आतंकवाद को ख़त्म करने की क़सम खाई. तब से नागराज ने तीन बार विश्व का दौरा किया और कई खलनायकों और आतंकवादियों को हराया।

सम्प्रति नागराज एक काल्पनिक शहर महानगर में अपने ही गोपनीय स्वामित्व वाले टी.वी. चैनल के कर्मचारी राज के रूप में जीवन यापन कर रहा है।

काल्पनिक चरित्र की जीवनी

प्राचीन काल में जब देवता बिना किसी प्रतिबंध के पृथ्वी पर विचरण करते थे, तब वहां तक्षकनगर नामक एक साम्राज्य मौजूद था जिस पर राजा तक्षकराज और रानी ललिता का शासन था। शासक दंपति को कोई
चिंता नहीं थी सिवाय एक के; उनकी कोई संतान नहीं थी। राजकुमार
या राजकुमारी की अनुपस्थिति ने एकमात्र नागपाश को उसका संभावित वारिस बनाया। नागपाश सम्राट का समरूप छोटा भाई था, जो यह जानकर कि केवल वही सिंहासन का संभावित उत्तराधिकारी है, चिंतारहित भव्य जीवन जीने लगा था।

जैसे-जैसे समय बीतता गया, रानी अपने बच्चे के अभाव में उदास रहने लगी। राजा को रानी के अवसाद का कारण समझ में आ गया और वे भी परेशान रहने लगे। पति-पत्नी आशीष के लिए अपने पारिवारिक देवता देव कालजयी की पूजा करते थे। देव कालजयी को भी उनके दुःख का कारण पता था, अतः एक दिन उन्होंने महान संतान पाने का उन्हें आशीर्वाद दिया। उनका आशीर्वाद सफल हुआ और जल्द ही रानी गर्भवती हो गई
और पूरे राज्य में ख़ुशी की लहर दौड़
गई सिवाय नागपाश के. इस संतान के जन्म का मतलब उसके लिए सिंहासन खोना था, अतः बच्चे के पैदा होने से पहले ही उसे मारने का उसने निर्णय लिया।

एक दिन जब रानी देव कालजयी की पूजा के लिए जा रही थी, तो नागपाश ने देवता के भोग की ढकी हुई थाली में,
प्रसाद को मरे हुए नेवले से बदल दिया। नागदेवता को ग़ुस्सा आ गया और उन्होंने अपनी विषैली सांस से रानी को बेहोश कर दिया. राजा ने देवता से
क्षमा याचना की और अपनी पत्नी को ठीक करने की प्रार्थना की लेकिन देवता ने ऐसा करने से इनकार कर दिया, जिसके बाद हताश राज ने
आत्महत्या करने का प्रयास किया. भक्त की मृत्यु झेलने में अक्षम, देव कालजयी ने उन्हें रानी की जान बचाने का एक उपाय बताया।
उन्होंने राजा को मणि दी और उसे
रानी की दवा से अभिक्रिया करने के लिए कहा. मणि रानी के शरीर से सारा विष बच्चे के शरीर की ओर पलट देगा,
लेकिन विष के बुरे प्रभाव के कारण रानी अपनी प्रजनन क्षमता खो देगी।

सारे राज्य में मातम छा गया और
राजा भी दुखी हो गए. नागपाश बहुत
खुश था कि वह अकेले वारिस के रूप में बच गया है। जब बच्चा पैदा हुआ तो सबको लगा कि वह मरा हुआ है
क्योंकि उसका सारा शरीर नीला था और उसमें जीवन के कोई लक्षण दिखाई नहीं दिए। हिंदुओं की प्रथा के
अनुसार नवजात शिशु को नदी में फेंक दिया गया। (भ्रमित मत हों कि उसका अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया गया. हिंदू पौराणिक कथाओं में, यह
माना जाता है कि उच्च क्षमता के योगी, आत्मा के रूप में अपना शरीर छोड़ सकते हैं और आत्मा, शरीर बदलना या विभिन्न दुनिया के बीच यात्रा करना जैसे कार्य निष्पादित कर सकता है। यह एक हिंदू प्रथा है कि जब कोई शिशु मृत पैदा हो या बचपन में ही उसकी मृत्यु हो जाए तो उसका शरीर नदी में प्रवाहित किया जाता है कि अगर कोई आत्मा उस शरीर का उपयोग करना चाहे तो वह उसे ले सकता है।
इसी कारण से जब वयस्क मरते हैं
तो उनका शरीर आग में नष्ट किया जाता है क्योंकि वयस्कों का एक सामाजिक जीवन होता है और उनके शरीर के दुरुपयोग की संभावना रहती है।

नागपाश ख़ुशी से झूम उठा और सीधे
नशे में धुत देव कालजयी के पास गया (देवता विशाल दो सिर वाले सांप के रूप में भव्य शाही खजाने की भी रक्षा करते थे) और उनसे यह कहते हुए शाही खजाने को सौंपने के लिए कहा कि वह सिंहासन का एकमात्र उत्तराधिकारी है इसलिए शाही खजाने
पर उसका अधिकार है। देव कालजयी ने इनकार कर दिया और उससे कहा कि सिंहासन का "असली उत्तराधिकारी" जीवित है और जब समय आए तब खजाना उसे सौंप दिया जाएगा। नाराज़ होकर नागपाश ने देवता के विरुद्ध अपनी तलवार उठाई लेकिन विशाल सांप की पूंछ के मात्र झटके से दूर जा गिरा। नागपाश
दो कटोरों पर गिरा, एक में बेहद जहरीला विष (हालाहल, जिसे हिंदुओं ने सबसे ख़तरनाक विष माना है) था,
जिसने उसके चेहरे को नष्ट कर दिया गया और उसके खून में मिल गया, और दूसरे में अमृत था, जिसने उसे अमर बना दिया। दोनों के एक साथ प्रभाव ने नागपाश को एक अमर विषैला आदमी बना दिया। उस समय नागपाश अपने शरीर के बदलाव को सहन नहीं कर सका और बेहोश हो गया।

जब राजा को देव कालजयी ने इन घटनाओं के बारे में सूचना दी तो उन्हें
पता चला कि उनका बेटा मरा नहीं है और उन्हें अपने जीवन के प्रति संभावित ख़तरों का भी एहसास हुआ. अतः उन्होंने तिलिस्म के महान ज्ञानी अपने वफ़ादार ज्योतिषी वेदाचार्य को आदेश दिया कि वे खज़ाने को ऐसे तिलिस्म में संरक्षित करें, जिसे केवल उनका बेटा तोड़ सके। वेदाचार्य ने देव कालजयी के सहयोग से तिलिस्म तैयार किया ताकि सुनिश्चित हो कि सिवाय राजा के बेटे के कोई उस तिलिस्म को तोड़ने में सक्षम न हो, अमर नागपाश
भी नहीं. जब नागपाश को होश आया तो उसने महसूस किया कि वह खजाना खो चुका है. गुस्से में आकर उसने राजा और रानी की हत्या कर दी।

जीवन-क्रिया रहित स्थिति में शिशु
नदी में बहता हुआ झाड़ियों में जाकर फंस गया। वहां पर वह लंबे समय तक पड़ा रहा.

इस बीच सर्प देवता देव कालजयी चिरायु इच्छाधारी नागों के शासक राजा मणिराज और उनकी पत्नी मणिका रानी के सपनों में प्रकट हुए, जो मानवीय दृष्टि से ओझल नागद्वीप नामक हिन्द महासागर के एक द्वीप में छिप कर जीवन बिता रहे थे।उन्होंने शिशु का स्थान बताया और उनसे उसका इलाज करने के लिए कहा। उन्होंने कहे अनुसार किया तथा शिशु को ढूँढ़ निकाला, और उन्हें यह भी पता चला कि वह द्वीप के महान सर्प महात्मा कालदूत से भी ज़्यादा विषैला है, जो यह संकेत देता है कि उसके पास भगवान का दिव्य विष है। शुरू में राज वैद्य अनिश्चित थे कि वे शिशु का इलाज कर पाएंगे या नहीं, लेकिन स्वयं देव कालजयी ने राजा से इलाज के लिए कहा था इसलिए वे आश्वस्त हुए
कि उनका उपचार सफल होगा. नियमों के अनुसार, किसी को भी इस द्वीप में
किसी बाहरी व्यक्ति को लाने
की अनुमति नहीं थी, इसलिए राजा ने उसकी उपस्थिति को गुप्त रखने
का फ़ैसला लिया।

कई साल बीत गए और इलाज का परिणाम नज़र आने लगा, हालांकि अभी भी उसमें कोई जीवन-क्रिया नहीं थी, पर शिशु का रंग धीरे-धीरे हरे में बदलने लगा। राजा ने यह समाचार रानी को दिया और उन्होंने बच्चे को गोद लेने का निर्णय लिया क्योंकि उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी। उनके निर्णय को दुष्ट तांत्रिक विषंधर ने सुन लिया जो द्वीप का शासक बनना चाहता था, लेकिन महात्मा कालदूत से डरता था। उसने गुप्त क्षेत्र पर हमला किया जहां शिशु को रखा गया था और
उसको साथ लेकर भाग गया, लेकिन ईश्वर के प्रकोप से डर कर उस शिशु को न मारने का फ़ैसला लिया और उसे
नदी की उन्हीं झाड़ियों में वापस रख दिया जहां पर वह मिला था। उसकी योजना विफल हुई क्योंकि जल्द ही रानी ने गर्भ धारण किया और एक
बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम विसर्पी रखा गया।

विषंधर को कभी पता नहीं चला कि जिस शिशु को उसने भटकने के लिए छोड़ दिया था उसे होश आ गया, पहले उसका चेहरा और फिर उसका शरीर सामान्य मानवों जैसा बना और उसने रोना शुरू किया। पास के मंदिर के एक
पुजारी ने उसे देखा और उसे प्रोफ़ेसर नागमणि को भेंट स्वरूप दिया जो पास के जंगल में सांपों की तलाश में भटक रहा था। अज्ञात कारणों से
पुरोहित ने एक झूठी कहानी सुनाई
कि शिशु एक ऐसी महिला का है जिसका बलात्कार हुआ था, और जो सर्प देवता की भक्तिन थी और शिशु को इच्छाधारी नाग बनने का आशीर्वाद प्राप्त है, और उन्होंने नागमणि से अनुरोध किया कि वे उसका पालन-पोषण कुछ इस तरह करे कि वह अपनी मां का बदला ले सके।

नागमणि ने समझ लिया कि पुजारी झूठ बोल रहे हैं लेकिन वह शिशु को अपने साथ ले गया। शिशु के रक्त
परीक्षण से पता चला कि उसकी श्वेत
रक्त कोशिकाओं में ख़ून की जगह सूक्ष्म सांप हैं। शिशु में असाधारण रोगहर शक्तियां थी और वह अत्यंत विषैला था। उसने शिशु का पालन-पोषण किया जो आगे चलकर नागराज बना।

कथानक सारांश

नागराज को नागमणि प्रोफ़ेसर की एक सृष्टि के रूप में विश्व के समक्ष प्रस्तुत किया गया। उसे विशिष्ट हत्यारा मशीन बनाया जा रहा था, और उसकी मूल योजना थी नागराज को दुनिया भर के खलनायकों और आतंकवादी गुटों के
बीच सबसे अधिक बोली लगाने वाले
को किराए पर देना।

प्रोफ़ेसर नागमणि ने अपने अन्य प्रायोगिक परियोजनाओं और अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के लिए पट्टे पर
उसका इस्तेमाल किया. नागमणि ने हमेशा दावा किया कि नागराज को सांप के विष के अंश देकर, उसका ख़ून ज़हर बनाते हुए उसकी शक्तियों को विकसित किया गया है। उन्होंने
दावा किया कि उसका विष 1000 विभिन्न प्रजातियों के सांप के काटने
का परिणाम है (यह विष-मानव या विष-कन्या के संबंध में भारतीय किंवदंतियों की छाप लिए है, जिन्हें अपने चुंबन द्वारा मारने के लिए पाला जाता है) और उसकी शक्तियां मृत इच्छाधारी नाग के भस्म से इलाज से विकसित हुई हैं। वास्तव में तथ्य यह
था कि नागराज किसी भी सांप की प्रजाति से ज़्यादा ज़हरीला था, क्योंकि उसका विष अलौकिक था।

मोटे तौर पर आकार बदलने वाले हिंदू मिथक के आधार पर, नागराज (श्वेत रक्त कोशिकाओं की जगह) अपनी रक्त कोशिकाओं में पलने वाले सूक्ष्म सांपों से शक्ति पाता था और उसे विषैली सांस विष-फुंकार और काट, तत्काल उपचार शक्तियां और उसकी कलाई से
अलग से निकलने वाले या रस्सियां, पैराशूट तथा उसकी कल्पना के अनुसार विभिन्न आकार ग्रहण करने वाले सांपों जैसी असंख्य अलौकिक
शक्तियां प्राप्त हैं। माना जाता है कि अगर वह किसी को काटे या कोई उसे काटे, तो उसके विष में पोटाशियम साइनाइड से भी तीक्ष्ण, किसी भी जीवित प्राणि के शरीर को गलाने की शक्ति मौजूद है।

अपने पहले मिशन के लिए, उसे दस लाख में बेचा गया था, और उद्देश्य एक प्राचीन प्रतिमा को हासिल करना था.
नागराज सफल होता है, लेकिन फिर साधु "बाबा गोरखनाथ" उसे नाकाम करते हैं, जो उसके मन को "प्रोफ़ेसर नागमणि" के नियंत्रण से मुक्त करते हैं. गोरखनाथ की एक नई शांति की दुनिया में जाग कर, नागराज विश्व से
आतंकवाद को समाप्त करने की क़सम खाता है और अपना लक्ष्य हासिल करने की दिशा में आगे बढ़ता है।

प्रारंभिक अंकों में नागराज की शक्तियां भी सीमित थीं, कभी-कभी शक्तिशाली मानव विरोधियों से भी वह हार जाता था और अस्थाई रूप से बेहोश हो जाता था, उसकी ताक़त भी काफी हद तक मानवों जैसी थी जैसे वह
किसी कार उठाने वाले को देखकर अपने विरोधी की शक्ति से अचंभित
हो जाता था. बरसों बाद नागराज इतना शक्तिशाली हो गया कि वह न केवल अकेले गिरती हुई कारों को थाम
लेता था बल्कि आसानी से चीज़ों को बाह्य अंतरिक्ष में फेंक देता था।

यह उल्लेखनीय है, और शायद विडंबनापूर्ण भी कि नागराज को अब एक पौराणिक-जादुई प्राणी के रूप में बदल दिया गया है जिसे अपने
दुश्मन के रूप में विलक्षण जीवों का सामना करना पड़ता है, जिसमें जादू-टोना और समय और अंतरिक्ष यात्रा के तत्व भी जुडे हैं। कई लोग इसे नागराज कॉमिक्स की निरंतर, ज़बरदस्त लोकप्रियता में वृद्धि के कारण के रूप में देखते हैं. हालांकि, शुद्धिवादियों का अब भी दावा है कि वे और अधिक यथार्थवादी, और अधिक व्यावहारिक
कहानियों को पसंद करते हैं जिनसे नागराज की शुरूआत हुई थी।

महत्वपूर्ण आंकडे

आयु: चिरायु (लगभग 65 वर्ष)
ऊंचाई: 6 फीट 2 इंच
वजन: 89 कि.ग्रा.
आंखें: नीली
बाल: काले

शक्तियां और क्षमताएं

नागराज यकीनन राज जगत का सबसे अधिक शक्तिशाली सुपर हीरो है, और अपने समय का सबसे शक्तिशाली इच्छाधारी नाग। बार-बार, उसने शेषनाग, वासुकीदेव, कालजयी महान सर्प देवताओं को चुनौती देने की क्षमता दिखाई है और कालदूत, त्रिफाना, महाव्याल और शीतनाग कुमार जैसे नागों को परास्त किया है, जो अपनी प्रजाति के सबसे ताकतवर नागों में गिने जाते हैं।

नागराज की प्राथमिक शक्ति उसके
शरीर के अंदर सूक्ष्म आकार में लाखों सांप शामिल करने की क्षमता है,
जहां उसका शरीर विभिन्न किस्मों के सांपों का घर बना हुआ है,,वह उन्हें अपने शरीर के बाहर आने और अपने विरोधियों पर हमला करने का आदेश दे
सकता है, तथा उन्हें रस्सी, फांसा, जाल, दस्ताने, पाइप आदि जैसी सरल रचनाओं या पैराशूट, नाव, ग्लाइडर और कई अन्य जटिल रचनाओं का आकार ग्रहण करने के लिए अनुदेश दे सकता है।
साधारण सांपों के अलावा, उसके पास जगमग सर्प (सांप जिनके शरीर अंधेरी जगहों में चमकते हैं), नागफणी सर्प (विस्तृत हो सकने वाले, कीलों से आवृत शरीर वाले सर्प, जो किसी को भी छेद सकते हैं और ख़ुद को फैला सकते हैं), ध्वंसक सर्प (विस्फोटक सर्प, जो किसी भी चीज़ के साथ
शरीर के संपर्क में आते ही विस्फोटित
होते हैं), मानस सर्प (सुस्पष्ट बनाने वाले सर्प, जो नागराज को उसके शरीर से सूक्ष्म मान  को विभाजित करने
में सक्षम बनाते हैं), उड़ान सर्प (पंखों वाले सर्प जो उड़ सकते हैं) जैसे व्यापक विविधता लिए रहस्यमय सांप
भी हैं. ये सर्प तेजी से द्विगुणित होते हैं, जिससे उनकी संख्या असीम
हो जाती है। उसके शरीर में कई इच्छाधारी सर्प बसते हैं, जैसे शीतनाग कुमार (शीतनागों का राजकुमार, जिसके पास बर्फ़ में जोड़- तोड़ की क्षमता है), सौदांगी (एक मिस्र सांप, जो तंत्र कला या इंद्रजाल में पारंगत है), नागू (एक मणिधारी सांप, जिसकी मणि उसे आकार बदलने, भ्रम पैदा करने, शक्तिवान हमले आदि जैसी अद्भुत शक्तियां प्रदान करती हैं). ये सर्प उसकी इच्छा पर शरीर से बाहर आ सकते हैं और लड़ाई में उसकी सहायता कर सकते हैं।
नागराज के शरीर में सबसे ख़तरनाक ज़हर, हालाहल रहता है, और इस प्रकार उसका दंश इस दुनिया में
लगभग हर इंसान और नागों के लिए घातक है।जिस किसी को वह काटे, या कोई उसे काटे, तो चंद सेकंड में ही वह पिघल कर ख़त्म हो सकता है। उसकी सांस में भी इसी विष की कुछ मात्रा शामिल है, जिससे नागराज इस सारे
विष को अपनी सांस में केंद्रित करने में सक्षम होता है, जिसे वह विष फुंकार कहता है, जिसके परिणामस्वरूप जो भी उसका कश ले उसकी तत्काल मृत्यु हो जाती है।
वह दूसरों पर इस विष को छोड़ सकता है, जिसे वह अपने विष-फुंकार में प्रयुक्त करता है, जो उतना ही ख़तरनाक और घातक है. यह विष उसके खून में ही मिला हुआ है, इस प्रकार जो भी इसका स्वाद लेता है
उसकी लगभग अचानक मौत
हो जाती है।
नागराज
की सभी शारीरिक विशेषताएं
परम-मानव स्तर पर पहुंच गई हैं, और
उसकी ताक़त, सहनशक्ति, स्थिरता, चपलता,
सजगता, गति मानव स्तर की ऊंचाई से परे हैं.
उसमें त्वरित रोगहर कारक भी है, जो फ़ौरन
किसी भी प्रकार के घाव का इलाज कर
देता है, जोकि उसके शरीर में बसे उपचार में
सहायक सांपों की बदौलत है. इस प्रकार बंदूकें,
तलवारें, तेज़ धार आदि उसके खिलाफ़ बेकार हैं.
उसकी सभी प्राथमिक इंद्रियां परम-
मानव स्तर तक वर्धित हैं, जो उसकी दृष्टि और
श्रवण शक्ति को मानवों की तुलना में कई
गुणा बेहतर बनाती है. वह वातावरण में कंपन
को भी महसूस कर सकता है, इस प्रकार
बिना अपनी दृष्टि का उपयोग किए
ही वह संचालित हो सकता है और
दुश्मनों का मुक़ाबला कर सकता है. उसमें
अंतर्दृष्टि भी है, जिसका वह उस समय उपयोग
करता है जब उसे अन्य पांच इंद्रियों से ज्यादा मदद
नहीं मिलती है. एक बेहद
जहरीला मानव सांप (वह सर्प मानव होने से
सहमत नहीं है) होते हुए, विष और दवाओं
का उस पर बिल्कुल ही प्रभाव
नहीं पड़ता है, जिससे वह इनके प्रति निरापद
है.
एक इच्छाधारी होने के नाते, उसमें आकार
बदलने की क्षमता है और वह
अपनी इच्छा के अनुसार
किसी भी प्राणी या व्यक्ति
का रूप धारण कर सकता है. वह इस शक्ति का उपयोग बेहतर
संचालन और संघर्ष के लिए अपने शरीर में पंख,
पंजे, मीनपंख विकसित करने के लिए कर सकता है.
अपने रूप बदलने
की क्षमता की वजह से वह अपने
आकार और आनुपातिक ताक़त
को किसी भी ऊंचे स्तर तक
बढ़ा सकता है. हालांकि "इच्छाधारी" अंक
की घटनाओं के दौरान उसने आकार बदलने
की कई शक्तियां खो दी थीं,
फिर भी वह अपनी इच्छा के अनुसार
सांप में बदलने की क्षमता रखता है. वह
अपनी इच्छाधारी शक्ति का उपयोग
हमलों के दौरान चकमा देने के लिए अपने परमाणुओं को मुक्त
करने, खुद को अदृश्य और अमूर्त करने और अड़चनों के
माध्यम से गुज़रने के लिए कर सकता है, भले
ही वह केवल 3 सेकंड के लिए इस रूप में रह
सकता है.
उसकी इच्छाधारी शक्ति उसके सिर
को किसी भी प्रकार के प्रहार और
हमलों से भी बचा सकता है, जिससे उसके दिमाग़
पर किसी प्रकार का टेलिपाथिक या विद्युत
चुम्बकीय हमला, स्रोत पर उल्टे प्रतिविस्फोटित
होता है.
नागराज की त्वचा यदि एसिड जैसे
किसी हानिकारक पदार्थ के संपर्क में आए,
तो उसके पास अपनी त्वचा को छोड़ने
की क्षमता मौजूद है, ठीक
उसी प्रकार जैसे एक सांप
अपनी "केंचुली" को त्यागता है.
नागराज सांप की तरह
ही सतहों से चिपक सकता है और
दीवारों पर चढ़ सकता है.
वह सम्मोहन शक्ति का मालिक है, और चंद पलों में
ही अपने शिकार को अपने कहे पर विश्वास करने
या पालन करने के लिए भ्रम में डालने के लिए सम्मोहित कर
सकता है.
नागराज के पास कुछ हद तक अलौकिक शक्तियां मौजूद हैं
जिसकी मात्रा अज्ञात है (विभिन्न अंकों में इस
शक्ति के विभिन्न स्तर दिखाए गए हैं).

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